Chander Dhingra's Blog

Wednesday, April 14, 2021

टू स्टेट्स - एक नई कहानी ( Two States - A New Story ) -67

टू स्टेट्स - एक नई कहानी ( Two States - A New Story ) -II- चन्दर धींगरा  /  Chander Dhingra   http://chander1949.blogspot.com/?m=1    हफ्तेवार इस लम्बी कहानी को साझा करने का सिलसिला जारी है। आज गुरुवार है, अब आगे  ..  ( ६७ )    पिंकी मेरी बात के पीछे छिपा सन्देश समझ गयी थी। उसने मामा जी को सरलता से बताया कि यह केवल एक प्रस्ताव था और अभी कुछ भी पक्का नहीं था और वह अपनी नौकरी में ही खुश थी। उसने कहा कि यदि इस टीवी धारावाहिक में उसका चयन हो भी गया तो भी वह एक हॉबी के रूप में उसे करेगी। मैं टेलीफोन पर हो रही बात सुन रहा था परन्तु अपने में ही मग्न होने का अंदाज़ दिखा रहा था। इधर की बात सुन, उधर की बात का अनुमान कर लेना, हम भारतीयों का ईश्वर-प्रदत्त गुण है। मुझे आभास हो रहा था कि मामाजी पिंकी से इस इस टीवी से वह कितना कमा लेगी, जानना चाहते थे। पिंकी ने कहा, ' क्या मामाजी, आप हर चीज को कमाई और पैसे से तौलते हैं, ऐसे भी कुछ काम होते हैं जिन्हें शौक के लिए किया जाता है...' वह क्षण भर को खामोश थी और उधर से मामाजी की बात को सुन रही थी। उसने कहा, ' मामाजी, आप भी तो गुरुद्वारे जाते हो और वहां बहुत सारे काम और सेवा करते हो, वो क्या पैसा कमाने के लिए करते हो ? आप इसलिए करते हो क्योंकि आपको अच्छा लगता है...  मैं भी यह सीरियल करुँगी क्योंकि मुझे ख़ुशी मिलेगी...' मुझे पिंकी की बातें ठीक लग रही थीं। वह फिर कुछ समय के लिए खामोश थी। मैं समझ रहा था कि मामाजी उसे टीवी के काम की, गुरुद्वारे की सेवा से तुलना न करने की सलाह दे रहे थे। अब पिंकी ने बात की समाप्ति करते हुए कहा, ' ठीक है...ठीक है... मैं ख्याल रखूँगी... हाँ कह दूँगी कि मेरे काम के लिए उन्हें इतना तो देना होगा... और इधर-उधर के सारे खर्चे देने होंगे... चलो, अब रखती हूँ...'  अगले दिन ऑफिस में पिंकी का फोन आया कि वह शाम को देवयानी के पास से होते हुए घर आएगी। मैंने कहा कि उसे घर आ जाना चाहिए और फिर वहां से दोनों जायेंगे। उसने कहा कि ऑफिस में कुछ विलम्ब हो सकता है, सो सीधे वहीं से होकर आना ठीक होगा। मैं कहा, ' देवयानी से तुम एक बार ही मिली हो... अकेले जाओगी... यह ठीक नहीं है...' उसने कहा कि सब ठीक है, ' पहले घर आऊं, फिर दौड़ते-दौड़ते वहां वहां पहुंचे... ये ठीक है या काम निपटाते हुए, आराम से घर आऊं, यह ठीक है...' मैं झुंझला गया, ' जो  ठीक लगता है वही करो...' मैंने  तड़ाक से फोन रह दिया था। मेरी सांसे तेज थी। मैं सोच रहा था कि एक पति के नाते मैं अपनी पत्नी की मदद करना चाहता था और कुछ नहीं, परन्तु मेरी पत्नी खुद को ही पूर्ण और स्वालम्बी समझती है।  मैं अपने में ही क्रोधित हो रहा था और चाह रहा था कि पिंकी की यह बात किसी से साझा करूँ। एक बार को मन में आया कि इन्द्राणी को फोन कर बताऊँ। आज, इस घटना याद करते हुए सोचता हूँ कि क्या उस दिन मैं किसी से पिंकी की शिकायत करना चाह रहा था ?  कुछ समय बाद फिर से पिंकी का फोन आया था। मैं अभी तक उस झुंझलाहट भरी मनस्थिति में था, ' हाँ बोलो, अब क्या हुआ ? उसने अपने मुस्कराहट भरे अंदाज़ में कहा, ' सर जी, कुछ हुआ नहीं है, बस एक आईडिया आया है दिमाग में... ऐसा करते हैं, आप घर से चाय-वाय पीकर पहुंचो और मैं यहाँ से सीधे पहुँचती हूँ... वहीं मिलते हैं... मोबाइल पास में  रखना... टच में रहेंगे...क्यों यह ठीक रहेगा न... चलो, अभी बहुत बिजी हूँ...शाम को मिलते हैं... बाय।  पिंकी का फोन एक तेज हवा के झोंके सा आया था। मैं अभी भी नाराज था, सोचा, ' मुझे तो बात करने का मौका ही नहीं मिला... मैं शाम को नहीं जाऊंगा  ... वैसे भी वहां जाकर मैं क्या करूँगा... उसे ही अपना काम समझना है...' अब मैंने इन्द्राणी को फोन घुमाया। इन्द्राणी ने इस समय मेरे फोन को पा, हैरानी दिखाते हुए कहा, ' अरे ! क्या हुआ, इस समय, सब ठीक है न ? मैंने कहा, ' हाँ, सब ठीक है... ' फिर मैंने उसे सारा वृतांत बताया। मैंने कहा, ' ये लड़कियाँ भी विचित्र होती हैं...सहायता भी नहीं लेना चाहती...' इन्द्राणी हँसने लगी। उसने कहा, ' ये सामान्य बात है... उसे कुछ विलम्ब हो रहा होगा सो ठीक ही है कि वह देवयानी के स्टूडियो से होती हुई घर आये... तुम घर से सीधे वहां चले जाना... मुझे तो यह ठीक ही लग रहा है...' मैं चुप रहा और बात को घुमा, अपनी पिशी के बारे में पूछने लगा। भीतर ही भीतर मैं तय कर चुका था कि मैं देवयानी के स्टूडियो न जाऊंगा। ऑफिस समाप्ति से कुछ समय पूर्व मैंने पिंकी को फोन किया, ' सुनो, मुझे भी आज देर हो रही है... मैं वहां स्टूडियो में न आ सकूंगा... तुम काम निपटाकर आ जाना... घर पर ही मिलेंगे.. ' पिंकी ने सरलता से कहा, ' चलो ठीक है, डोन्ट वरी... घर आकर बताती हूँ कि देवयानी से क्या बात हुई... ओके '  मैं ऑफिस से निकल आया और सोचने लगा कि क्या किया जाये ? आज घर तो विलंब से पहुंचना था। साथी लोग भी ऑफिस से निकल रहे थे। कुछ उनसे बातचीत की। चाय पीने का प्रस्ताव आया तो मैंने ना नहीं कहा और उनके साथ आगे बढ़ गया। हम लोग ऐसे संध्या के अवसर पर, ऑफिस के पीछे की गली में एक खास स्टाल पर चाय पीने जाते थे। वहां पर गरमागरम तली हुई कुछ खास चीजों के साथ, चाय का मज़ा बढ़ जाता था। आज तो मेरे पास समय था, मैं चाहता था कि इसी बहाने समय बिताया जाये। कुछ समय तक हम मित्रगण वहां रहे। अभी भी समय था। वहां से निकल, आर्ट्स एकेडमी में चला आया। यहाँ हमेशा कुछ न कुछ गतिविधि रहती है। यहाँ समय बिताना उचित लगा था।  आठ बजे के बाद मैं घर पहुंचा था। माँ ने विलम्ब का कारण पूछा तो मैंने कहा, ' बस यूँ ही... कुछ काम था...' माँ ने कहा, ' मनप्रीत भी नहीं आयी... ' मैं चुप रहा। बिशाखा ने चाय के लिए पूछा तो मैंने इस तरह न किया मानों घर की चाय में वो  बात नहीं जो ऑफिस के पास वाले स्टाल या आर्ट्स अकेडमी वाली कैंटीन में होती है। कुछ समय बाद पिंकी आ गयी थी। वह बहुत  खुश थी। उसने मुझे कहा कि देवयानी ने उसका रोल फाइनल कर दिया था। शूटिंग भी कुछ ही दिनों में शुरू होने वाली थी। माँ ने मुस्कुराते हुए वही बात पूछी जो उसके मामाजी कह रहे थे, ' देवयानी कुछ दे भी रही है या यूँ ही...'  पिंकी ने बताया कि धारावाहिक में तीन मुख्य महिला पात्र थे और तीनों नए कलाकार थे और तीनों को एक समान फीस दी जाएगी। माँ ने पूछा, ' लेकिन कितनी ? इस पर पिंकी ने ऐसा मुँह बनाया मानों कह रही हो, नहीं पता लेकिन क्षण भर बाद उसने कहा, ' शायद पचास हज़ार ...' अब माँ के मुंह बनाने की बारी थी, मानों कह रही हों, ये राशि तो ठीक है...   रात में पिंकी ने मुझे विस्तार से सब बात बताई। एक बात जो झलक रही थी कि देवयानी और उसके अन्य साथी पिंकी को अपने धारावाहिक में लेने का पक्का निश्चय कर चुके थे। पिंकी ने ऑफिस में भी अपने सीनियर से इस धारावाहिक प्रपोजल के बारे में बता दिया था। उन्हें कोई आपत्ति न थी यदि यह काम वह अपने ऑफिस के काम के बाद करती है। पिंकी ने बताया कि उसके सीनियर स्वयं भी शौकिया रूप में बंगाली थिएटर में काम करते थे और उन्हें पिंकी का यह काम करना अच्छा लगा था। देवयानी के इस धारावाहिक का विज्ञापन भी कुछ ही दिनों में टीवी पर दिखाई देने वाला था और इसके लिए अगले रविवार को पिंकी को वहां कुछ शूट देने के लिए जाना था। मैंने सुना तो कहा, ' लो, अब रविवार को भी तुम घर से बाहर...' पिंकी ने इसे स्वीकार करते हुए कहा, ' कुछ पाने के लिए तो कुछ खोना ही पड़ता है... वैसे भी मेरा जॉब देखते हुए देवयानी ने मेरे शॉट्स को, जहाँ तक संभव हो, रविवार को  रखने का वादा किया है... अब से मुझे अपना संडे कुर्बान करना होगा...  मम्मी जी को भी बता दूँगी...'  मैं तो खुद में ही खिन्न हुआ बैठा था, पिंकी की इस बात ने मुझे और भी झुंझला दिया था। मैंने मन ही मन सोचा, ' चलो, अब से मैं भी अपना रविवार, रोबी दा के साथ बिताया करूँगा...'  अगले दिन देवयानी के प्रोडक्शन हाउस और पिंकी के बीच एक कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर भी किये गए थे। पिंकी ने यह सब खबर अपने घर और मामाजी को दे दी थी। वो सभी बहुत हर्षित थे और पिंकी को बधाइयाँ दे रहे थे।  रविवार को सुबह ही एक गाड़ी आयी और पिंकी को धारावाहिक के प्रमोशनल शूट के लिए ले गयी। कुछ क्लोज शॉट्स स्टूडियो में ही होने थे और कुछ आउटडोर थे जिनके लिए पार्क स्ट्रीट को चुना गया था। पिंकी के घर लौटने तक शाम के सात बज गए थे। वह बहुत उत्साहित और खुश थी कि कैसे पार्क स्ट्रीट में शूटिंग देखने के लिए भीड़ जाम हो गयी थी और कैसे देवयानी, डायरेक्टर और कैमरामैन उसके काम से प्रभावित थे। पिंकी ने बताया कि सभी को विश्वास था कि वह अपने रोल में पूरी तरह सफल होगी। पिंकी ने मेरे पास आ कहा, ' आप खुश हो न ? मैंने भी मुस्कुराते हुए कहा, ' बिल्कुल... अब तो तुम्हारे प्रमोशनल शॉट्स का इंतज़ार है... कब दिखाएंगे टीवी पर ? उसने कहा, फ्राइडे रात से यह विज्ञापन शुरू हो जायेगा... कुछ खास जगहों पर होर्डिंग्स भी लग जायेंगे... हमारा प्रोडक्शन हाउस इस धारावाहिक को सफल करने के लिए पूरी कोशिश में जुटा है... ' मैंने कहा, ' अब से तो तुम्हारा चेहरा रविवार को भी नहीं दिखेगा... छह दिन होटल के बॉस देखेंगे और रविवार को देवयानी... हस्बैंड को तो तुम धारावाहिक में ही दिखोगी...' पिंकी ने यह बात सुनी तो मुझे बाँहों में लपेट लिया, ' ओह माय डिअर हस्बैंड, तुम्हारे लिए तो सातों रात हैं... और संडे को शूटिंग में तो आप साथ रहोगे ही...' मैंने कहा, ' अरे, मैं तुम्हारा बॉडी गॉर्ड बनकर कहीं नहीं जाने वाला... मैं अपने लिए कुछ और काम करूँगा... अब से मेरा भी अपना संडे होगा...'  ( आज बस, गुरुवार को आगे, यहीं पर  ...)

1 comment:

  1. बहुत बढ़िया । कुछ पाने के लिये कुछ खोना भी पड़ता है । सुंदर पंक्ति । 🌷🌷🌷👍👍👍👍👌🏻

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