Chander Dhingra's Blog

Wednesday, April 7, 2021

टू स्टेट्स - एक नई कहानी ( Two States - A New Story ) - 66

टू स्टेट्स - एक नई कहानी ( Two States - A New Story ) -II- चन्दर धींगरा  /  Chander Dhingra                                                                               http://chander1949.blogspot.com/?m=1    हफ्तेवार इस लम्बी कहानी को साझा करने का सिलसिला जारी है। आज गुरुवार है, अब आगे  ..    ( ६६ ) पिंकी को देवयानी की ओर से मिले प्रस्ताव से माँ बहुत खुश हो रही थी। बाबा भी कार में एक ओर बैठे, अपनी विशेष टिप्पणियां करते जा रहे थे। उनका मानना था कि वह तो अपनी बहू माँ के गीत में खो ही गए थे। उन्होंने कहा कि बहू माँ के गाने में एक भी खटकने वाली त्रुटि न थी। मैं खामोश था। कुछ समय बाद मैंने कहा, ' रविंद्र संगीत कोई सरल कला नहीं है... एक दो गानों के अभ्यास से यह कला पूर्ण नहीं हो जाती... इस में पूरी तरह से डूब जाना पड़ता है... खुद को समर्पित कर देना होता है...'  इस पर पिंकी हंसने लगी, ' तो ठीक है, मैं भी डूब जाऊँगी और खुद को समर्पित कर दूंगी... मुझे तो यह बंगाली संगीत अच्छा भी लगने लगा है...' अब मैंने पूछा कि उसका तो ऑफिस भी है, समय कहाँ से लाएगी। इस पर उसने कहा कि समय का क्या था, दिन में चौबीस घंटे होते हैं उसी में सब कुछ एडजस्ट करना होता है और वह यह सब कर लेगी। घर आने पर कार से उतरते हुए मैंने कहा, ' आज मिली प्रशंसा से फूल मत जाना... यह तालियाँ एक पंजाबी लड़की के बंगाली रविंद्र संगीत गाने के कारण मिल रही थी...हम बंगाली बड़े दिल के होते हैं, कोई अबंगाली हमारी भाषा में गाये तो हम उसे सिर पर बिठा लेते हैं...लेकिन यह फ़िल्मी संगीत नहीं है...'पिंकी तो आज  उत्साह में उछल रही थी। उसने माँ की ओर देखते हुए और हँसते हुए कहा, ' मम्मी जी, क्या आपको भी कुछ जलने की गंध आ रही है ?  हम हँसते-हँसते घर में प्रवेश कर रहे थे। मैं भी पिंकी की बात पर मुस्कुरा तो रहा था परन्तु मेरी मुस्कान में एक झेंप छिपी हुई थी।   रात को पिंकी ने ख़ुशी से उछलते हुए टीवी समाचार वाचिका की बात उठायी। मैंने तुरंत कहा, 'अरे छोड़ो न उसे... टीवी पर ऐसे समाचार पढ़ने वाले बहुत मिलेंगे...'  पिंकी ने कहा कि वह ऐसी वैसी नहीं लगती थी। मैंने उसका दिया हुआ विजिटिंग कार्ड जेब से निकाला तो पाया कि उसका अपना एक स्टूडियो था और वह टीवी कार्यक्रमों की निर्माता भी थी। अब मेरे दिमाग ने उसका सम्बन्ध केडिया परिवार से जोड़ा और खुद से कुछ ऐसा अनुमान लगाया, ' तो यह बात है, मारवाड़ी पैसा लगा हुआ है, इस बंगाली लड़की के स्टूडियो में...'  मुझे समझ आ गया कि देवयानी एक पेशेवर और महत्वाकांक्षी महिला थी। मैं सोचने लगा कि ऐसे लोग ही तो सफलता पाते हैं। देवयानी भी एक दिन अपना टीवी चैनल खोल लेगी। अभी कुछ दिन पूर्व ही मैंने इसी तरह की एक बंगाली महिला की सफलता की कहानी पढ़ी थी जिसने हेल्थ केयर व्यवसाय में सफलता पायी थी और जिसका सपना था कि वह कलकत्ता में एक विश्व स्तरीय अस्पताल लाये। बिस्तर पर लेटते हुए पिंकी ने कहा, ' कल देवयानी के स्टूडियो तो जायेंगे... देखें उसकी योजना क्या है ? मैंने एक बार फिर से उसे नज़रअंदाज़ करने को कहा किन्तु देवयानी के आकर्षक विजिटिंग कार्ड ने मुझे कुछ उत्साहित तो कर ही दिया था। मैंने कहा, ' ठीक है, तुम्हारा मन है तो चलते हैं... मिल लेते हैं... तुम क्या कल ऑफिस से समय पर घर आ पाओगी... तुम्हारा कार्य और समय तो निश्चित होता नहीं है...' पिंकी ने कहा, ' एक संयोग बन रहा है... मैं तो समय से आ जाऊँगी... आप मिस्टर रवि के साथ किसी मीटिंग में न फँस जाना...' मैंने उत्तर न दिया था और कुछ सोचते हुए नींद की प्रतीक्षा करने लगा था।  सुबह पिंकी ने मुझे ऑफिस में उतारते हुए फिर से याद दिलाया कि आज शाम को समय से घर पहुँच जाना था और आठ बजे देवयानी से मिलने जाना  था। उसकी बात पर मैं मुस्कुरा दिया था। कार्य में दिन भर जुटा रहा था किन्तु बीच बीच में शाम का ख्याल आ जाता था कि समय से घर पहुंचना था। यदि रोबी दा की ओर से भी शाम के लिए कोई निर्देश आया तो आज उन्हें भी न कह देना था। परन्तु उस दिन ऐसा कुछ हुआ ही नहीं। घड़ी में देखा, ऑफिस से निकलने का समय हो चला था। अचानक न जाने क्यों इन्द्राणी को फ़ोन लगा दिया था। उसे कल शाम की क्लब में हुई, पिंकी की सफलता का बताया। वह  खुश हुई थी और उसने मुझे बधाई दी थी। उसका मानना था कि मेरी पत्नी एक गुणवान लड़की थी और यदि बंगाली संगीत में उसकी रूचि थी तो उसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए था। तब मैंने उसे देबजानी के स्टूडियो जाने वाली बात बताई थी। उसकी प्रतिक्रिया वाह की थी। उसने बताया कि यह तो बहुत अच्छी बात थी क्योंकि उन दिनों देवयानी का टीवी जगत में प्रभाव बढ़ रहा था। मैंने कहा कि वह शायद पिंकी के पंजाबी समाज से होने का लाभ उठाना चाहती थी। साथ ही साथ माँ के महिला आयोग की अध्यक्षा हो जाने का भी प्रभाव था। इन्द्राणी ने कहा कि इस तरह का लाभ और स्वार्थ हर कोई लेता है और यदि वह लेती है तो इसमें कुछ अनुचित नहीं है। इन्द्राणी ने कहा कि मुझे देवयानी के प्रस्ताव को देखना चाहिए। उसने यह भी कहा कि वह रात को ही मुझे फोन करेगी और जानेगी कि देवयानी की मीटिंग में क्या हुआ ? संध्या में हम दोनों देवयानी के स्टूडियो पहुँच गए थे। स्टूडियो सच में हमारे घर से अधिक दूर न था। मैं सोच रहा था कि यह छोटा-मोटा रिकॉडिंग स्टूडियो होगा किन्तु देख कर आश्चर्य हुआ कि यह एक पूर्ण विकसित और व्यवस्थित स्टूडियो था। उसका अपना सुन्दर ऑफिस था। हमें वही बिठाया गया था। वह कुछ समय बाद हमें मिलने आयी थी। उसने गर्मजोशी से हमारा स्वागत किया। पिंकी को अपने ऑफिस में देख,देवयानी बहुत प्रसन्न दिख रही थी। उसने अपने एक अन्य साथी को भी बुलवा भेजा और हमें अपने एक प्रस्तावित कार्यक्रम की रूपरेखा के बारे में बताया। यह एक लम्बा चलने वाला धारावाहिक था। जिसकी कहानी तीन सहेलियों के इर्दगिर्द घूमती है। इसमें एक पंजाबी लड़की का चरित्र भी था जिसका लालन-पालन और शिक्षा कलकत्ता में हुई थी। उसने बताया कि उसकी कल्पना में जो चरित्र था, वह मानों मनप्रीत के लिए ही लिखा गया था। मैंने उसे कहा कि मनप्रीत को तो अभिनय क्षेत्र में कोई अनुभव नहीं था। मेरे यह कहने पर पिंकी ने ख़ामोशी भरी नज़रों से मुझे ऐसे देखा था मानों कहना चाहती हो कि वह कोशिश कर लेगी। मेरी बात पर देवयानी ने कहा जो दो अन्य लड़कियां ली जा रही थीं वे भी नयी एवं अनुभव वाली नहीं थी। उसने कहा कि उसे विश्वास था कि मनप्रीत इस चरित्र में खुद को ढाल लेगी। मैंने हूँ... कह, उसकी बात को हल्का कर देने का प्रयास किया था और कहा कि शायद उसे विदित न था कि मनप्रीत ने पांच सितारा होटल में एक अत्यंत व्यस्त कार्य भी संभाल रखा था और शायद वह इस धारावाहिक के लिए पूरा समय न दे पायेगी। अब पिंकी आगे आ गयी थी। उसने कहा, ' यह मैं अपने ऑफिस से बात कर सब मैनेज कर लूंगी...' चाय आ गई थी। मुझे अच्छा लगा कि रोबी दा की मीटिंग की तरह यहाँ प्लास्टिक के कप न थे। यहाँ सुन्दर क्रॉकरी में सजाकर चाय लायी गई थी। चाय पीते हुए कुछ बातें और हुई। देवयानी के सहयोगी ने कहा कि मनप्रीत जी को एक दिन और आना होगा और वह उस अधिक जानकारी देंगे और रुपरेखा समझा देंगे। फिर उन्होंने पिंकी को कुछ कागज देते हुए अंग्रेजी में कहा,' मनप्रीत जी, आप यदि इसे पढ़ लें तो अच्छा होगा... ये कहानी के सिनोप्सिस हैं और क्या आप कल इसी समय एक बार फिर आ सकेंगी ? मैं पिंकी का मुख देखता रह गया था। उसने तपाक से कहा, ' क्यों नहीं... मैं आ जाऊँगी और सिनोप्सिस तो आज रात को ही पढ़ लूँगी...'  घर लौटने पर पिंकी ने सबसे पहले माँ को पूरी जानकारी दी थी। उनके सामने ही वह सिनोप्सिस भी पढ़ने बैठ गयी थी। मैंने कहा कि इतनी आतुरता दिखाने की जरूरत न थी और उसे बाद में आराम से पढ़ना चाहिए। उसने कहा, ' समय है तो अभी पढ़ लेना ठीक है...तीन-चार पृष्ठ ही तो हैं...' कुछ समय बाद ही उसने माँ को कहा, ' मम्मी जी बहुत स्ट्रांग स्टोरी है... अगर मौका मिला तो मैं अवश्य इसमें काम करुँगी...'  यह कह उसने एक फोन लगाया। मैंने पूछा, ' किसे फोन कर रही हो ? उसने कहा, ' सस्पेंस है... रुको अभी पता चल जायेगा...' मैं तो समझ ही रहा था कि वह अपने घर पर यह खबर देना चाहती थी। मैंने कहा, ' अभी किसी को मत बताओ... अभी कुछ भी फाइनल नहीं किया गया है...' उसने सिर्फ इतना कहा, ' किसी को नहीं बता रही... लवली को बता रही हूँ...'  मैंने मन में सोचा कि लवली से होते हुए यह खबर सब तक आज ही पहुंच जाएगी। पिंकी ने फोन पर बात शुरू की और बालकनी की तरह निकल गयी। मुझे जो सुनाई दिया वह था, ' सुन लवली, जबरदस्त न्यूज़ है... सुनेगी तो न जाने तेरा क्या हाल होगा...' वह लगभग दस मिनिट तक अपनी बहन से बात करती रही थी। ससुराल से बड़ी बहन अपनी छोटी बहन से जैसी बातें करती हैं, पिंकी का लहजा वैसा ही था, एक सहेली जैसा। लौटकर कमरे में आने पर उसने कहा, ' मैंने लवली को कह दिया है कि मम्मी-पापा को छोड़कर, अभी किसी को न बताये...'  हम लोग खाना खाकर सोने की तैयारी कर ही रहे थे कि उसके मामाजी का फोन आ गया था। माँ ने फोन उठाया था। मामाजी ने उन्हें बधाई दी और फिर मेरे साथ बात की। उन्होंने कहा, ' वाह भाई, आपने तो कमाल कर दिया... हमारी बेटी को टीवी पर लगवा दिया... लाख लाख बधाइयाँ जी...' मैं सोचने लगा इन सरदार जी को लगता है टीवी पर कोई नौकरी लग गयी है। इन्हें क्या पता कि एक धारावाहिक में अभिनय का प्रस्ताव आया है और वह भी अभी पूरी तरह से निश्चित नहीं है। मैंने फोन पिंकी को थमाते हुए कहा, ' लो, चंडीगढ़ से बात दिल्ली पहुँच गयी है...अब तुम ही समझाओ...तुम्हारे मामाजी समझ रहे हैं कि टीवी स्टेशन में कोई अच्छी खासी नौकरी मिल गयी है ? ( आज यहीं तक, अगले गुरुवार को इससे आगे, यहीं पर )

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