Chander Dhingra's Blog

Friday, February 12, 2021

टू स्टेट्स - एक नई कहानी ( Two States - A New Story ) - 58

टू स्टेट्स - एक नई कहानी ( Two States - A New Story ) -II- चन्दर धींगरा / Chander Dhingra http://chander1949.blogspot.com/?m=1 ( ५८ ) इन्द्राणी की बातों से मेरे उदास से मन को राहत सी मिली थी। उसने मुझे खाने का निमंत्रण दिया और कहा कि उसकी माँ ने आज घर में हम सब की प्रिय मछली बनायी थी। मैंने कहा कि आज नहीं, आज का डिनर तो मेरी ओर से। मैंने उसे बाहर चलने को कहा। मेरे दिमाग में आज के अख़बार में दिखा एक विज्ञापन घूम रहा था। वह पूछती जा रही थी कि कहाँ जा रहे थे परन्तु मैं खामोश था। जब हम लेक के पास उस रेस्टोरेंट के सामने पहुंचे तो वह हंसने लगी। उसने कहा, ' अरे ! इसके बारे में तो मैंने आज ही एक विज्ञापन देखा था और मैं सोच रही थी कि इसे आज़माया जायेगा.. अच्छा हुआ तुम यहाँ ले आये..' हम दोनों एक ओर कोने की सीट पर जा बैठे थे। यह नया रेस्टोरेंट था और इसका ही विज्ञापन देख ही मैं रुक गया था। अक्सर ऐसा होता है कि किसी छोटी सी बात पर हमारा मन रुक जाता है और कहीं न कहीं मन की किसी सतह पर वह हमें आकर्षित करता रहता है और अपनी ओर खींच ले आता है । मेरे साथ आज कुछ ऐसा ही हुआ था। जब से मैंने इस रेस्टोरेंट के बारे में देखा था, तब से यही लग रहा था कि इसे परखा जाये। कलकत्ता का प्रसिद्द चाइनीस रेस्टॉरेंट था जिसकी एक शाखा अब दक्षिणी कलकत्ता में खुली थी। हमने अपने पसंद के व्यंजनों का आर्डर दिया। इन्द्राणी ने कहा कि मनप्रीत भी साथ होती तो बहुत अच्छा होता। मैंने कहा, ' हाँ, ये बात तो ठीक है .. फिर कभी उसे लेकर आऊंगा.. परन्तु पता नहीं, पंजाबी लड़की को चाइनीस खाना पसंद आएगा या नहीं..हालाँकि कलकत्ता के चाइनीज़ खाने ने देश भर में अपनी पहचान बना ली है ..' नए रेस्टोरेंट का इंटेरियर बहुत अच्छा था। हल्की ध्वनि में वाद्य संगीत चल रहा था। प्रकाश भी मद्धम था। इन्द्राणी ने आगे की ओर हथेलियों पर चेहरा टिकाते हुए कहा, ' अच्छा, अब बताओ, कैसा चल रहा है, वैवाहिक जीवन .. इतनी सुन्दर और गुणवान पत्नी पायी है, तुमने ..’ मैंने कहा, ' सब ठीक है..उसने नए घर में अच्छे से एडजस्ट कर लिया है..माँ की प्रिय बन गयी है, बाबा भी उससे प्रभावित हैं.. सब ठीक ही चल रहा है ..' इन्द्राणी ने बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि उसे भी ऐसा ही लग रहा था कि यह एक्टिव लड़की सबका मन मोह लेगी। मैंने कहा कि वह अपने को बहुत जगह व्यस्त करती जा रही थी और अब उसके एक अच्छे जॉब में लग जाने की भी उम्मीद थी और मेरे लिए यह चिंता की बात थी कि उस पर अधिक प्रेशर न बन जाये। इन्द्राणी ने हूँ ..कहा तो मैंने बात आगे बढ़ाते हुए कहा, ' नए माहौल में इच्छा होती है, सबको प्रभावित करने की और हम जोश में सब को हां करते जाते हैं और बाद में संभालना कठिन हो जाता है..' इन्द्राणी ने कहा, ' अरे ! तुम तो शादी के बाद समझदार हो गए हो.. अगर तुम्हें लगता है कि वह इतना सब न संभाल पायेगी तो उसे सचेत करो.. परंतु, यह भी याद रखना कि कुछ लोगों की क्षमता, हमारी उम्मीद से अधिक होती है ..' हम बात करते जा रहे थे और चाइनीस व्यंजनों का आनंद भी ले रहे थे। मैंने कहा, ' यहाँ चाइना टाउन वाला स्वाद नहीं है ..पहला ही ओरिजिनल होता है ..बाद में खुलने वाली शाखाओं में सिर्फ नाम ही होता है ..' इन्द्राणी ने कहा, ' नहीं, ऐसी बात तो नहीं..मुझे तो अच्छा लग रहा है, यहाँ का खाना ..' फिर हँसते हुए कहा, ' तुम अपनी वाइफ के साथ नहीं आये हो न इसलिए तुम्हें स्वाद नहीं मिल रहा ..' मैं इस बात पर मुस्कुरा दिया और मैंने कहा, ' शायद यही बात है ..वैसे किसी भी बात को आप जैसे स्पष्ट कर देती हैं,उसका जवाब नहीं..इसीलिए तो आप इन्द्राणी दीदी हैं ..' इन्द्राणी ने मुँह बनाया, ' ख़बरदार जो फिर से दीदी कहना शुरू किया..हम एक उम्र हैं और दोस्त हैं .. ' खाना खा बाहर आये तो मैं खुद को काफी सहज महसूस कर रहा था। इन्द्राणी को उसके घर छोड़, मैं अपने घर पहुंचा तो पाया कि माँ और पिंकी भी आ चुकी थीं। मुझे देखते ही पिंकी दौड़ते हुए आयी और सरलता से कहने लगी, ' आज तो मज़ा ही आ गया ..सेमिनार बहुत अच्छा था.. बहुत कुछ नया जानने को मिला और मज़े की बात, ये सेमिनार उसी होटल में था जहाँ मुझे इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है.. मैं तो सब देख आयी हूँ..बहुत अच्छा है..ये सर्विस तो मैं नहीं छोडूँगी..मम्मी जी ने तो किसी से कहकर सैलेरी का भी अनुमान लगवा लिया है.. ' मैंने कहा ,' ये तो बहुत अच्छी बात है, पर मुझे बैठने तो दो..' फिर उसने व्यंग्य सा करते हुए कहा, ' हाँ - हाँ बहुत मेहनत-मजदूरी कर के आये हो, पहले चाय-पानी पियो, आराम कर लो, फिर बात करना ..' मैंने कहा, ' ऐसा नहीं है पर घर में घुसा हूँ बैठने तो दो..' माँ और वह दोनों हँसने लगी। माँ ने कहा, ' ये ऐसा ही है..इससे थोड़ी देर बाद बात करना..' बाद में माँ ने सारी बात विस्तार में बतायी। पिंकी इतनी उतावली हो रही थी कि वह मुझसे एकाउंट्स की कुछ किताबों के बारे में पूछने लगी थी। उसका कहना था कि वह आज रात से ही तैयारी शुरू कर देगी और मुख्य विषयों का पुनर्पठन कर लेगी। मैं समझ रहा था कि यह नौकरी वह पाकर ही छोड़ेगी। मैंने उसे धैर्य रखने को कहा पर उसका छात्र जैसा मन उसे उकसा रहा था। उसकी उत्सुकता देख, मैंने कुछ पुस्तकें उसे निकालकर दी। वह वहीं एक ओर बैठ, पन्ने पलटने लगी थी। मेरे बाबा जो इधर-उधर मंडरा रहे थे, उसकी जिज्ञासा को देख खुश हो रहे थे। उन्होंने पिंकी के सिर पर हाथ रखते हुए कहा था कि उसे यह जॉब मिलेगा ही और यदि न मिला तो यह उस होटल कंपनी का ही नुकसान होगा क्योंकि वे एक प्रतिभाशाली कर्मचारी को खो देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के इस बड़े होटल उद्योग के लिए प्रतिभा का ही महत्व है। पिंकी ने अपनी प्रशंसा सुनी तो कहा, ' डैडी जी, आपका और मेरे नानक बाबा का आशीर्वाद रहे तो सफलता मिलेगी ही..' मैंने कहा कुछ नहीं, किन्तु मन में सोचा कि इतनी सुन्दर और आकर्षक प्रतिभा को तो सब जगह ही सफलता मिलेगी। यदि मैं इस पद के लिए जाऊँ तो अस्वीकार कर दिया जाऊँगा। अपने मन की बात को मैंने कुछ इस तरह से निकाला, ' अरे, तुम स्मार्ट हो, अट्रैक्टिव हो, तुम्हारा चयन होकर ही रहेगा.. होटल,आतिथ्य-सत्कार का उद्योग है, यहाँ यह सब पहले देखा जाता है.. डिग्रियाँ बाद में देखी जाती हैं ..' पिंकी ने मेरी बात सुनी तो कहा, ' पर मेरे पास तो अच्छी ख़ासी डिग्री भी है..' बाबा ने उसका साथ देते हुए कहा, ' और अनुभव भी.. चाहे एक-दो साल का ही हो.. ' माँ ने अचानक मुझसे खाने के बारे में पूछा, ' खाना खाओगे? हम दोनों तो वहीं से खाकर आये हैं.. सेमिनार के बाद डिनर भी था..' मैंने कहा कि मैं भी खा चुका हूँ ..' पिंकी ने सुना तो कहा, ' अरे कहाँ ? मैंने कहा, ' तुम फाइव स्टार में खाकर आयी हो तो हम भी कहीं अच्छा ही खाकर आये होंगे..' उसने जिद्द सी करते हुए कहा, ' बताओ न कहाँ से खाकर आये हो ? तो मैंने कहा कि इन्द्राणी ने खिला दिया था। उसने मुस्कुराते हुए कहा, ' अच्छा जी ..अकेले अकेले हो आये उनके घर ..' मैं और इन्द्राणी चाइनीस रेस्टोरेंट में खाने गए थे, ये बात मैं न जाने क्यों दबा गया था। क्या कोई चोर था, मेरे भीतर? ( आज बस, आगे अगले गुरुवार को, यहीं पर ...)

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