Chander Dhingra's Blog

Wednesday, April 21, 2021

टू स्टेट्स - एक नई कहानी  ( Two States - A New Story ) : 68 -69

टू स्टेट्स - एक नई कहानी  ( Two States - A New Story ) -II- चन्दर धींगरा  /  Chander Dhingra                                                                               http://chander1949.blogspot.com/?m=1    हफ्तेवार इस लम्बी कहानी को साझा करने का सिलसिला जारी है। आज गुरुवार है, अब आगे  ..    ( ६८ - ६९ ) शुक्रवार की शाम हम सभी टीवी के सामने बैठ गए थे। पिंकी ऑफिस से न लौटी थी। उसने फोन कर बताया था कि शाम के एक लोकप्रिय कार्यक्रम के दौरान, उसके धारावाहिक का प्रमोशनल विज्ञापन आने वाला था। उसने यह भी बताया कि यह विज्ञापन सामान्य विज्ञापनों से लम्बा होगा।  उसने कहा कि कुछ समय के बाद एक और विज्ञापन आएगा और फिर यह क्रम चलता रहेगा। एक बार ये, एक बार वो। उसने कहा कि उसे लौटने में विलम्ब हो जायेगा।   समय से धारावाहिक का प्रमोशनल  एक चमक के साथ प्रसारित हो गया था। हम सब आनंदित थे। पिंकी को टीवी पर देख ऐसा लगा कि यह कोई दूसरी ही लड़की थी। उसके पात्र के अनुसार उसने पंजाबी रंग-ढंग में दो पंक्तियाँ भी बोली थी। मुझे लगा कि इस प्रमोशनल में बम्बई वाला अंदाज़ था। कुछ समय बाद दूसरा वाला प्रमोशनल आया। वह तो और भी तेज अंदाज़ में था। इसमें पार्क स्ट्रीट वाले आउटडोर के दृश्य थे। पिंकी को अपनी दो सहेलियों के साथ, कार से उतर कर होटल में जाने, का दृश्य था। फिर किसी डिस्को का दृश्य था और पिंकी का एक क्लोज़अप था जिसमें वह किसी अमीरज़ादे को गुस्से और बदले की भावना से देख रही थी। दोनों विज्ञापन देखने के तुरंत बाद ही माँ ने घोषणा कर दी थी कि यह धारावाहिक बंगाली टीवी सीरियल्स के तमाम रिकॉर्ड तोड़ देगा। बाबा ने कहा, ' अभी से कुछ नहीं कहा जा सकत...मुझे तो हमारी बंगाली संस्कृति वाले धारावाहिक और फिल्में ही अच्छी लगती हैं...देखें, ये टीवी पर क्या नया गुल खिलाता है...' मैंने कुछ न कहा था बस पिंकी के घर लौटने की प्रतीक्षा कर रहा था। कुछ ही समय में वह आ गयी थी। वह बहुत खुश थी। उसने हँसते हँसते मेरे हाथ में फूलों का गुलदस्ता देते हुए कहा, 'ये आपकी वाइफ को उसके जनरल मैनेजर की ओर से मिला है... ' फिर उसने माँ की ओर मुखातिब होते हुए बताया कि होटल की लॉबी में बड़े टीवी पर सभी ने एक साथ पहले प्रमोशनल को देखा था और जोर से तालियां बजायी थी। उसने कहा कि उसके जी एम तो बहुत खुश थे और चाहते थे कि बड़े होटल वाले दृष्यों की शूटिंग उनके होटल में की जाये। पिंकी ने कहा, ' मैं कल ही देवयानी से इस सम्बन्ध में बात करुँगी...हमारे होटल में सब तरह की सुविधाएं भी मिलेंगी...' मैंने कहा, ' अरे, तुम क्यों इन बातों में पड़ती हो...सीरियल बनाने वालों को जहाँ ठीक लगेगा, वहीं करेंगे...वे लोग खुद निर्णय लेंगे...' मेरी इस बात पर पिंकी चटक गयी, ' ये क्या बात हुई... मेरे होटल को फ्री की पब्लिसिटी मिलेगी और देवयानी को फ्री की लोकेशन...मैं तो दोनों का हित देख रही हूँ...मेरा तो कुछ नहीं जाता...' मैंने चिढ़ते हुए स्वर में कहा, ' मैंने समझाना था सो समझा दिया... अब जो तुम्हारी मर्जी...ऐसे मामलों में दखलअंदाज़ी न करना ही ठीक होता है...' पिंकी ने आगे कुछ न कहा पर मुझे महसूस हुआ कि उसने जो मन बनाना था, बना लिया था। वह उठकर एक ओर गयी और अपनी बहन लवली को फोन लगाया और उसे सारा वृतांत हँसते हँसते बता दिया। उसने फोन मुझे थमाते हुए शरारती अंदाज़ में कहा, ' आपकी प्यारी साली है, बात करो...' मैंने कहा, ' तुमने तो सब बता ही दिया है, अब मैं क्या बात करूँ...' वह मुझे जबरदस्ती फोन दे, आगे किचन घुस गयी। उसने बिशाखा से कहा, ' दीदी, आज तो लकी दिन है, कुछ बढ़िया खिला रही हो  तो ? बिशाखा ने उसकी हिंदी को समझते हुए, अपनी स्टाइल की हिंदी में कहा, ' जा आप बोलेगा  ...मैं बना देगी...' मैं लवली से बात कर रहा था पर मैंने यह सुन लिया था। पिंकी ने घर का वातावरण सुखद बना दिया था। माँ, बाबा, बिशाखा सभी खुश थे। एक मैं ही था जो न जाने किस मानसिक स्थिति में था। आज याद कर रहा हूँ तो अपनी मनस्थिति को पढ़ पा रहा हूँ। मैं खिन्न था और कुछ क्रोधित भी था। एक तरह की नाराज़गी और उदासीनता मेरे भीतर घर कर रही थी। मैं बाहर से सामान्य बनने का प्रयास कर रहा था और भीतर मन में उथल-पुथल छायी हुई थी।     अगले दिन सुबह पिंकी ने अपनी एक साड़ी शान्तु की पत्नी को दी थी। वह बहुत खुश हुई और आशीर्वाद देने लगी। पिंकी ने स्नेह से उसे अपनी बाँह में लपेट लिया और कहा, ' तुम कितनी प्यारी हो...क्या लगाती हो, तुम्हारी स्किन इतनी मुलायम कैसे है ? वह हँसने लगी। मैंने इशारे से पिंकी को बुलाया और कहा कि विलंब हो रहा था। ऑफिस पहुँचते ही साथियों की बधाइयाँ मिलने लगी थी। रोबी दा ने भी वह टीवी प्रमोशनल देखा था। उन्होंने फोन किया था। वह मुस्कुराते हुए पूछ रहे थे कि मेरी पत्नी का लक्ष्य क्या था ? उन्होंने कहा कि मेरी पत्नी बहुत महत्वाकांक्षी प्रतीत होती है और उसे इस महानगर में आगे बढ़ने के बहुत से आयाम दिख रहे थे। उन्होंने एक बार फिर से बधाई देते हुए पूछा, 'ये धारावाहिक कब से प्रसारित होने जा रहा है... कल इसके विज्ञापन को देखने के बाद हमारी उत्सुकता बढ़ गयी है... ' मैंने कहा कि दो-तीन सप्ताह बाद से यह धारावाहिक आरम्भ होने जा रहा था। दिन भर मैं इसी धारावाहिक और उस में पिंकी के पात्र के ख्यालों में उलझा रहा था। मैंने पिंकी को फोन लगाया तो वह बहुत उत्साहित और आनंदित दिखी थी। उसने कहा, ' क्या बताऊँ ? सभी साथी धारावाहिक की प्रतीक्षा कर रहे हैं... देवयानी का भी फोन आया था... वह कह रही थी कि रिस्पांस बहुत ही पॉजिटिव रहा है... वह चार दिन लगातार शूटिंग की बात कर रही थी... मुझे छुट्टी लेनी होगी, मैंने अपने बॉस को संकेत तो दे दिया है... इस ओर से कुछ समस्या न होगी...' फिर वह खिलखिलाते हुए कहने लगी, ' कल से शूटिंग शुरू...कलकत्ता टीवी का नया चेहरा... मनप्रीत कौर राय...' मैंने कहा, 'अभी से इतना खुश न हो... धारावाहिक को आरम्भ होने दो, तुम्हारे अतिरिक्त इस धारावाहिक में दो चेहरे और भी हैं और उनके रोल भी बराबरी की टक्कर के हैं...' पिंकी ने मेरी बात में सहमति जताई। उसने कहा कि वह तो सब कुछ अपने नानक बाबा के ऊपर छोड़ रही थी।   पिंकी शूटिंग आदि में पूरी तरह व्यस्त हो गयी थी। वह सुबह नाश्ता कर निकल जाती और फिर उसके लौटने का कुछ ठीक न रहता था। घर आने पर वह हम सब को बहुत उत्साह के साथ, दिन भर के  घटनाक्रम को सुनाती।थी। धारावाहिक के होर्डिंग्स भी नगर के कई प्रमुख स्थानों पर लग चुके थे। देवयानी का प्रोडक्शन हाउस इस धारावाहिक के प्रति जन-कौतूहल बनाने में सफल हो गया था। निश्चित दिन सभी को पहले पर्व की प्रतीक्षा थी। आज एक बार फिर से हम सभी टीवी के सामने बैठे हुए थे। पिंकी तो साथियों के साथ किसी अन्य जगह में थी। उसका फोन आया तो उसने बताया कि वे लोग एक क्लब में सीरियल के पहले एपिसोड देखने के लिए बैठे हुए थे और वहां पर पिकनिक जैसा माहौल बना हुआ था। उसके फोन लगातार आ रहे थे। मुझे मालूम था कि उसे इस एपिसोड के बारे में सब कुछ पता था परन्तु वह जोश में थी कि हम लोग इसे देखें और अपनी प्रतिक्रिया दें।  समय से एपिसोड आया। इसमें एक तरह की तीव्रता थी जो दर्शकों को बांधे रखने में सफल थी। इस एपिसोड में कहानी और पात्रों के परिचय के रूप में पेश किया गया था। ये कहानी एक बड़े कॉरपोरेट घराने और उसमें चलने वाली घटनाओं और षड्यंत्रों में गुंधी हुई थी। पिंकी ने मुझे सारांश एक बार बताया था। माँ ने एपिसोड समाप्त होने पर तालियाँ बजाते हुए, घोषणा कर दी थी कि यह सीरियल बांग्ला टीवी में एक ट्रेंड सेटर का काम करेगा और बम्बई के सीरियल्स को टक्कर देगा। मैंने असहमति दिखाई और कहा, ' ऐसा कभी हो ही नहीं सकता... बंगाली दर्शकों की मानसिकता ऐसी कहानियों को स्वीकार न करेगी... देख लेना... कुछ सप्ताह बाद ही लोग ऊब जायेंगे...'  बाबा भी मेरी इस बात से सहमत थे। इन्द्राणी का फोन आया था। उसका मत तो माँ की तरफ था। माँ निश्चिंत थी कि मनप्रीत सफल होगी क्योंकि वह अपने पात्र में एक दम फिट थी। इन्द्राणी ने तो एक कदम आगे की बात कह दी थी।  उसने कहा, ' कोई आश्चर्य नहीं कि किसी दिन हिंदी धारावाहिक में उसे ऑफर मिल जाये...'  पिंकी देर से पहुंची थी। आज पहली बार वह कुछ थकी सी दिखी थी। उसने स्वीकार भी किया कि पिछले कई दिनों से वह  लगातार काम से जूझती रही थी। उसने कहा कि उसने इस अभिनय के कार्य को एक शौक के रूप में लिया था और उसे लगता था कि यह सरल सा कार्य था किन्तु अब उसे लगने लगा कि इसमें केवल शारीरिक ही नहीं मानसिक थकावट और तनाव भी होता है। उसने यह भी कहा कि उसे इसमें आनंद भी मिल रहा था। माँ ने उससे शूटिंग के वातावरण आदि के बारे में पूछा तो उसने कहा कि सभी साथी बहुत अच्छे थे और उसके साथ सहयोग कर रहे थे। पिंकी देवयानी की कार्य क्षमता से भी प्रभावित लगी थी।   चार-पांच एपिसोड की शूटिंग हो चुकी थी लेकिन काम लगातार चल रहा था। प्रोडक्शन टीम ने पिंकी के काम को इस तरह से सुनियोजित किया हुआ था  कि उसे केवल रविवार को ही आना पड़े। यह साप्ताहिक धारावाहिक कुछ ही समय में प्रसिद्धि के शिखर पर था। इसकी प्रतीक्षा की जाने लगी थी। पिंकी को सराहा जा रहा था। मैं उसके साथ कहीं निकलता तो लोग उसके पास आने का प्रयास करते। एक दिन मैंने उसे कहा कि यह मुझे अच्छा नहीं लगता है और मैं उसके साथ भीड़ वाले वाले स्थानों में नहीं जाया करूँगा। उसने अवाक होते हुए कहा, 'ये क्या बात हुई, ये तो सामान्य सी बात है... कलकत्ता में तो मुंबई जैसा हाल नहीं है... यहाँ तो लोग बस थोड़ा पास आना चाहते हैं...' मैंने कहा कि जो भी मैं अब से उसके साथ, यहाँ-वहाँ नहीं जा पाऊंगा और उसे माँ या बिशाखा का साथ लेना होगा। पिंकी कुछ असंतुष्ट थी परन्तु उसने बात आगे न बढ़ाई। मैंने सोचा था कि वह मुझे मनाने की कोशिश करेगी। ऐसा कुछ न हुआ था। पिंकी अपने काम में हमेशा की तरह लगी हुई थी। वह अपनी संगीत की क्लास भी जा रही थी और जब आवश्यक होता देवयानी के साथ होती। माँ ने तो मान लिया था कि उनकी बहू बहुत व्यस्त हो चली थी। एक विज्ञापन संस्था ने भी उससे संपर्क किया था। उसका पांच सितारा होटल में कार्य करना उसके काम आ रहा था। हम दोनों केवल रात में ही मिल पाते थे। एक दिन मैंने उससे कहा कि उसे कुछ दिन का ब्रेक लेना चाहिए। मैंने सुझाव दिया कि क्यों न हम दोनों एक सप्ताह के लिए कहीं बाहर हो आयें। उसने कुछ इस अंदाज़ से मुझे देखा कि मानों कह रही हो, ' मेरे लिए यह संभव नहीं है...मैं किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में काम नहीं करती...' हो सकता है वह ऐसा नहीं सोच रही थी और यह मेरा अपना भ्रम था। मैंने कहा, ' हां, तुम तो न कहोगी ही... तुम तो सुपर बिजी हो...' वह मुस्कुरा दी और कहा, ' नहीं ऐसी बात नहीं है... इस सीरियल के काम को तो नहीं छोड़ा जा सकता...मैं देवयानी से बात करुँगी...शायद वह मेरे शेडूल में कुछ एडजेस्ट कर दे तो हम कुछ दिन के लिए कहीं हो आते हैं...' वह क्षण भर के लिए रुकी मानों कोई विचार उसके दिमाग में चमक गया हो। वह बोली, ' चंडीगढ़ जायेंगे... दिल्ली से होते हुए...' उसकी बात पर मैं झुंझला गया था। मैं कहा, ' बस तुम्हें अपना घर ही याद आया... मैं नहीं जाऊँगा तुम्हारे चंडीगढ़...' आज सत्य की सौगंध लेकर बैठा, उस समय को याद कर रहा हूँ तो देख पा रहा हूँ कि पिंकी की सफलता में न जाने क्यों मुझे अपनी पराजय दिखती थी? यही मेरी बेचैनी और अस्थिरता का कारण था।  ( आज यही तक, गुरुवार को इससे आगे, यहीं पर...)

1 comment:

  1. बहुत बहुत सुंदर कहानी और उसकी रफ़्तार 🌷🌷🙏🌷🌷🌷🙏

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